Sunday, 15 December 2019

ईश्वरीय ज्ञान सन्यासियों के लिए नहीं बल्कि गृहस्थी लोगों के लिए भी है जरूरी : साध्वी

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम आयोजित


अबोहर. दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्रीगंगानगर रोड पर स्थित आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें साध्वी हरप्रीत भारती ने सत्संग विचारों में कहा कि  जब जीवन में पूर्ण गुरु का पदार्पण होता है तो वह मस्तक पर हाथ रखकर दशम द्वार खोल भीतर ही ईश्वरीय अनुभूतियों का दर्शन कराते है, जो कि मानव जीवन का लक्ष्य है। इस ज्ञान के माध्यम से ही मनुष्य अपने अंदर निहित असीम शक्तियों को पहचानकर परमानंद को प्राप्त कर सकता है।

पूर्ण गुरु के सानिध्य में प्रत्येक शिष्य सही दिशा की ओर अग्रसर होता है। 'ब्रह्मज्ञान' अर्थात ईश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति के पश्चात ही जीवन में भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित होती है। यह ज्ञान मात्र शारीरिक स्तर पर ही नहीं बल्कि आत्मिक स्तर पर भी परिवर्तन लाता है। साध्वी ने कहा कि ईश्वरीय ज्ञान मात्र सन्यासियों के लिए नहीं अपितु गृहस्थी लोगों के लिए भी अनिवार्य है। ईश्वर से एकाकार होकर मानव का जीवन विकास की ओर अग्रसर हो जाता है।


संस्थान का प्रत्येक सदस्य ब्रह्मज्ञान के मार्ग पर बढ़ता हुआ आंतरिक परिवर्तन का एक सशक्त उदाहरण है। ब्रह्मज्ञान द्वारा ही विश्व शांति लक्ष्य की प्राप्ति सम्भव है। आध्यात्मिक ज्ञान से प्रकाशित व आत्मिक रूप से जागृत मानव ही अपने परम लक्ष्य की ओर बढ़ता हुआ मानव जाति के कल्याण व विकास में सहयोग दे सकता है। इस अवसर पर साध्वी तेजस्विनी भारती और साध्वी जसपाल भारती ने भजनों का गायन किया।

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